.png?alt=media&token=c3897067-b613-4a6d-b1c5-ec59e9154725)
सुकून की तलाश
आखिर कौन है ये सुकून ? जिससे पूछो सबको एक चीज़ चाहिए... सुकून !
कौन है ? कहाँ है ? … कैसे दिखता है?
कहाँ छुपा रहता है ? जल्दी मिलता क्यों नहीं ?
कैसा महसूस होता होगा जब वो मिलता होगा ?
और मुझे पता कैसे चलेगा कि सुकून मुझसे मिलने आया है ?
या फिर कोई और मुझे उससे मिलवाएगा ?
हम सब सुकून की माला जपते रहते हैं।
मैं उसे ढूँढ़ने के लिए दौड़ पड़ी।
कभी परिवार के साथ, तो कभी दोस्तों को पुकारा मैंने,
कभी औरों का दु:ख बांटा मैंने,
तो कभी खामोश कमरे में खुद से बात करने लगी।
सुकून की तलाश में, मैंने आज को खो दिया।
कल जो था मेरा, उस जहान को खो दिया,
सब की तरह मुझे भी अब सुकून की है तलाश ।
मगर उस सुकून को पा ना सकी, क्या है यह- जो मुझसे दूर भाग रहा है ? मैं जितना पीछे जाऊं उतना ही ओझल हो रहा है ?
सोचा किसी का साथ हो तो शायद वहां मिल जाएगा ये सुकून,
जिंदगी की सारी सुख सुविधा मिल जाए तो शायद वहां मिल जाएगा ये सुकून ।
उलझन कहां थी ये समझ ही नहीं पा रही थी मैं।
किस चीज़ की है तलाश यही समझ नहीं पा रही थी ।
रात बैठे खाने के मेज़ पर चम्मच को बेमतलब घुमाते जा रही थी,
अंदर- एक स्थिरता, संपूर्णता एक भरपूर्ता का बोध हो रहा था।
विचारों के कुएँ में झाँक कर देखा, तो अंदर समंदर का एहसास हुआ,
अरे ! ये क्या, ये बात मुझे पहले क्यों नहीं समझ आया…
सुकून सिर्फ एक धारणा है, औरों की सुनी सुनाई बातों का मिश्रण है...
कि सुकून ऐसा होता है, वैसा होता है...
तुम जब हर छोटी चीज पर खुश हो सको, तो वही सुकून है....
ना जीत की चाह - ना हार का डर,
ना खोने का भय - ना पाने का आनंद...
जब तुम अपने अंदर एक ठहरव ले आओ, बस वही सुकून है ।
यह हर एक इंसान के जीवन पर निर्भर करता है कि उसके लिए सुकून क्या है।
किसी को मुट्ठी भर खुला आसमान चाहिए, तो किसी को दो वक्त की रोटी, किसी को चैन की नींद चाहिए, तो किसी को सर पर छत ।
अंतर्मन में हर पल को जीने का परम एहसास.. बस यही सुकून है ।
निश्पक्ष भाव से हर पल को जीने का एहसास को ही सुकून कहते है...
मगर आपको तय करना है कि आपके हिसाब से सुकून क्या है ?
स्वेता गुप्ता
Comments (0)
Please login to share your comments.