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पावन रात

सोलह कलाओं से सजे चंदा, अमृत की वर्षा बरसाए,
कोजागरी की इस पावन रात में, माँ लक्ष्मी भ्रमण पर आए।
खुले आसमाँ तले रखी जो खीर, ओस की बूंदों से पावन हो,
रास पूर्णिमा का यह उत्सव, हर मन में खुशियाँ भर जाए।
शरद चांदनी की शीतल छाया, मन के सारे कष्ट मिटाए,
कृष्ण कन्हाई के रास की यादें, हर धड़कन में फिर जाग जाए।
जाग रहा जो इस सुखद रात में, वैभव का वह वर पाता है,
आश्विन मास की यह पूर्णिमा, जग को अमृत रस पिलाए।
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