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पन्ने (अतीत से वर्तमान का सफर)

पलट कर देख लो चाहे अतीत के पन्नों को बार-बार,
मगर सीख लेकर उनसे, वर्तमान को संवारा जा सकता है।
लकीरों में जो लिखा नहीं, उसे भूल जाओ अब तुम,
मेहनत की स्याही से, नसीब दोबारा लिखा जा सकता है।
गुज़रे हुए कल की राख में, अब चिंगारी मत ढूँढो,
आज की सुलगती आग से, अंधेरा मिटाया जा सकता है।
ठोकरें तो महज़ रास्ता बदलने का एक इशारा होती हैं,
संभल कर चलें तो, हर रास्ते को आसान बनाया जा सकता है।
जो बीत गई सो बात गई, अब उस पर रोना कैसा,
नए सिरे से ज़िन्दगी का, नया अध्याय रचाया जा सकता है।
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