.jpg?alt=media&token=096511e1-78cc-4afc-a38a-10b50324e56a)
नूर

चमक चमक कर बिजली
अपनी नाराजगी दिखाती रही
गरज गरज के बादल ने
अपना सुकून खोया था
वो जा रहा था इस शहर से जिस वक्त
ये शहर बहुत मायूस था
ये आसमान भी बहुत रोया था।
वो मासूम सा बच्चा एक नूर खुदा का है
वो चांद का टुकड़ा मुझसे दूर जरा सा है।
उसके जाने से मौसम भी उदास है
अजब सा आज कल करवट बदलता है
कभी बरसता है आँख से पानी बादल के
कभी सूरज निकल कर बादलों से चमकता है।
तुम भी जानते हो और मैं भी मानती हूं ये
मां बाप की दुआओं का असर साथ चलता है
आसमान से छंट जाएगे ये बादल काले
मद्धम सी ठंडक का सुहाना दिन साथ लाएगा।
मेरे घर का उजाला मेरा चिराग साथ लाएगा
वो आएगा तो त्योहारों का मौसम साथ लाएगा।
मीनू यतिन
Comments (0)
Please login to share your comments.