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मेरी गलती

गलती हर इंसान से होती है,
मुझसे भी अनजाने में हुई,
अपने बच्चे के भाग्य में मैंने,
एक ऐसा बाप चुन लिया,
जो 'बाप' के मायने तक नहीं जानता।
वह हर रिश्ते की डोर तो परखता है,
पर जाने क्यों,
अपनों और परायों के बीच,
हर बार रिश्तों को तराजू में तौलता है।
ऊपर से देता है छांव का दिखावा,
मगर अंदर ही अंदर,
वह सिर्फ अपने लालच की बाजुओं से
इस मासूम श्रेष्ठ को निहारता है।
स्वाति साहू
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