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कहीं ऐसा न हो

कुछ काम आ सकूं इंसानियत के मै भी
मैं बेकार था, कहीं बेकार ही न रह जाऊं
एक नाम के एक मुकाम की तलाश में हूं कबसे
मैं इसका बस तलबगार ही न रह जाऊं
मेरे गुनाहो को माफ कर देना के मै भी इंसान हूँ
मैं किसी के आंसुओं का गुनाहगार भी न रह जाऊं ।
एक बेचैनी ताउम्र साथ चली है मेरे
मैं आज भी यूँ ही बेकरार ही न रह जाऊं
इंसाफ मेरे संग भी हो ए खुदा
रह न जाऊं कतार में
उसके इश्क पे पूरा हक हो मेरा
मैं खाली एक हकदार ही न रह जाऊं ।
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