.jpg?alt=media&token=f844fa69-d8cd-44cc-9bd1-9bdcfb3f1c2f)
दीदार

आज हर नज़र को चाँद का दीदार चाहिए,
सुहाग की इस रात में पिया का प्यार चाहिए।
शर्मा रहा है चाँद भी नई नवेली दुल्हन की तरह,
उसे भी जैसे बादलों का इक श्रृंगार चाहिए।
देखो ज़रा! वो चाँद निकला, सब पुकार उठीं,
सजी हुई हर थाल को अब बस दीदार चाहिए।
अर्घ्य देकर चाँद को, छलनी से पिया निहारा,
व्रत खोलने को उनके हाथों से जल चाहिए।
न दौलत की तमन्ना है, न कोई और आरज़ू,
हर जन्म में बस आपका ही साथ चाहिए।
*
Comments (0)
Please login to share your comments.