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चलो खैर एक भ्रम तो टूटा

चलो खैर एक भ्रम तो टूटा
सोचा था बरसों साथ रहे हम
सोचा था साथ निभाओगे तुम
सोचा था बात जब मेरी होगी
तब तो आगे आओगे तुम
चलो खैर एक भ्रम तो टूटा
तू ही सच्चा मै ही झूठा।
एक खाली पन भर के मुझमें
क्या सुकून पा जाओगे तुम
मेरे आंसू सवाल करेंगे
क्या कुछ बतला पाओगे तुम
चलो खैर एक भ्रम था टूटा
आंसू भी दिखावा मै भी झूठा।
अब कोई भ्रम ,आस न कोई
साथ रहे पर पास न कोई
बरसों मुड़ के देखा पीछे
रोज का ही था नई बात न कोई
फिर भी भ्रम पाला ही क्यों था
किसके भरोसे खुद को खो के
ये सब कुछ संभाला ही क्यों था
चलो खैर एक भ्रम तो टूटा
सच तो मैं हूँ ,जग है झूठा।
मीनू यतिन
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