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उनका नाम ?
दोस्तों-यारों की महफ़िल सजी थी, यादों का कारवां चल रहा था...
मुझसे किसी ने पूछा कि आखिर कौन था वो,ज़रा नाम तो बताओ ?
ज़ुबान पर उनका नाम अते-अते रुक गई,
दिल ने तुरंत होठों को आगाह किया...
अब उनका नाम दोबारा होंठों पर मत लाना ।
हमने पूछा दिल से, नाम लेने में क्या हर्ज़ है भला ?
दिल ने कहा नाम लेने से अनजाने ही साही...
उनका नाम होठों से छूना होगा,
चलेगी फिर वही जस्बतों की लहर,
फिर दोबारा आंसुओं में भीगना होगा ।
दिल और होठों में बेहस शुरू हो गई,
तभी मैंने दिमाग की सुनी और खामोशी से महफिल से चली गई,
अगर आप होते तो क्या करते ?
स्वेता गुप्ता
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