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स्कूल की यादें, इम्तेहान और होली

स्कूल की यादें, इम्तेहान और होली
एक ओर किताबों का ढेर
एक और गुलाल की होली।
एक उम्र जो जिम्मेदारी और
बचपने में उलझी है
उस पर फागुनी बयार और होली।
नींद में गिरते उठते
पढ़ते लिखते
चाय के कई दौर चलते
रसोई से आ ती खुशबू मन बहकाती
ढोल ताशे का शोर और होली
बीत जाएगी बिन भीगे भिगोए
इस बार शायद
मनाते खुद को
अगली बार खेलेंगे इत्मीनान से होली।
मीनू यतिन
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