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इंतजार

फुर्सत मिलेगी कभी तो
अपने मन का करेंगे
ये सोच के सालों गुजर गए
वो वक्त कभी आया ही नहीं ।
कभी फुर्सत नहीं मिली
कभी इजाजत नहीं मिली
बड़े इत्मीनान से
बैठेंगे चार पांच दोस्त
कभी, वक्त क्या हुआ
ये सोच के उठेंगे नहीं।
कभी एक मुकम्मल दिन
बिना बात की बात होगी
कोई क्या सोचेगा,
ये सोच के रुकेंगे नहीं ।
ठहाके गूंज उठेंगे
आंखे भी भीग जाएगी
हँसी और आंसू के एक साथ के लम्हे
एक दूसरे से गिले शिकवे रहेंगे नहीं।
अभी भी है यकीन के
एक दिन कभी
फुर्सत मिलेगी कभी तो
अपने मन का करेंगे ।
मीनू यतिन
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