मेरे बच्चों के लिए

मेरे बच्चों के लिए

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meenu yatin

17 Feb 20261 min read

Published in poetrylatest

मेरी उंगली थाम के भीड़ में चलने वाले
गोद में ले लो डर के कहने वाले
कब उंगली छुड़ा के
मेरा हाथ खुद थामने लगे।

सड़क पार करते हुए
वो मुझे सम्हालने लगे।

तोतली बोली में अपनी बात समझाने वाले
जिंदगी के फलसफे समझाने लगे।

ठीक से किसी को पहचान भी न पाते थे जो
अब वो रिश्तों के मायने समझाने लगे।

समय को सामने से गुजरते देख रही हूं
सयाने होते  बच्चों को बढ़ते देख रही  हूं।

तुम्हारा होना मेरे लिए हर दिन त्यौहार है
तुम जानते भी हो   कि तुमसे असीम प्यार है।

संतान का भरोसा  बड़ी बात है
संतान तो मिल भी जाए
वो  विश्वास नहीं मिलता।

वो आस मिल जाए
तो किस्मत की बात है।

मीनू यतिन

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meenu yatin

17 Feb 20261 min read

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मेरी उंगली थाम के भीड़ में चलने वाले
गोद में ले लो डर के कहने वाले
कब उंगली छुड़ा के
मेरा हाथ खुद थामने लगे।

सड़क पार करते हुए
वो मुझे सम्हालने लगे।

तोतली बोली में अपनी बात समझाने वाले
जिंदगी के फलसफे समझाने लगे।

ठीक से किसी को पहचान भी न पाते थे जो
अब वो रिश्तों के मायने समझाने लगे।

समय को सामने से गुजरते देख रही हूं
सयाने होते  बच्चों को बढ़ते देख रही  हूं।

तुम्हारा होना मेरे लिए हर दिन त्यौहार है
तुम जानते भी हो   कि तुमसे असीम प्यार है।

संतान का भरोसा  बड़ी बात है
संतान तो मिल भी जाए
वो  विश्वास नहीं मिलता।

वो आस मिल जाए
तो किस्मत की बात है।

मीनू यतिन

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