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तुम बिन

सूना सूना सा यमुना का तट
सूनी हो गई नीम की छाँव है
सूनी सी गालियां ,सूना सा पनघट
सूना सा ये सारा गाँव हैं ।
जाना भी जरूरी लगता है
पर व्याकुल मन को मनाये कौन
जीवन ही खाली लगता है
ये बात उन्हें समझाये कौन
मैया का अंतर्मन जाने कौन भला
पास न कान्हा न बलराम है।
सूना सूना सा घर आंगन
सूना गोकुल सूना पूरा वृंदावन
अब कितनी पुलकित होगी वो धरती
जहां रखे तुमने पाँव हैं।
यश बढ़े ,कीर्ति बढ़े
सच हो जाए सपने सारे
मुस्कान तुम्हारी सजी रहे
यही है प्रार्थना,यही अरमान है।
*मीनू यतिन
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