.jpg?alt=media&token=8388208c-b3d2-44aa-b171-16669c134e86)
मित्रता
राधिका शाम को लाठी के सहारे धीरे-धीरे बगीचे की बेंच तक आई और वहाँ बैठ गई। घर में बच्चों की फ्रेंडशिप पार्टी थी और उन्हें यह हिदायत दी गई थी कि शाम को घर के बाहर ही रहना, देर रात को ही वापस आना!
पर्स खोलकर उन्होंने नन्हे बच्चे द्वारा दिया हुआ फ्रेंडशिप बैंड देखा। दादी, आपका कोई मित्र नहीं है? लो, इसे बाँध लो। अचानक नयन की याद आ गई और वह बेचैन हो उठीं। माँ-बाप द्वारा खोजी गई लड़की से विवाह करते समय नयन ने कहा था - प्रेम हमेशा कायम रहेगा; पति के रूप में नहीं तो मित्र के रूप में! लेकिन किसी दिन मिलना हो ही नहीं पाया। विनय को गुज़रे अब पाँच वर्ष हो गए थे। साथ रहे इतने वर्षों के सुखी वैवाहिक जीवन के बाद आज अचानक नयन की याद क्यों आ गई?
लाठी के सहारे एक वृद्ध पास में आकर बैठे। सामने देखा... धुँधले दृश्य... पुरानी यादें... हल्के-से स्पंदन... हृदय में ठंडक... आँसुओं की एक धारा राधिका के गाल पर उतर आई।
तुम्हारे घर में भी पार्टी है, नयन? नयन ने हाँ में सिर हिलाया। उन्होंने पर्स से बैंड निकाला और उसके हाथ पर बाँधते हुए कहा - चलो, हम भी आज फ्रेंडशिप डे मनाएँ! नयन ने कहा - हैप्पी फ्रेंडशिप डे!
और दोनों के चेहरे पर हँसी खिल उठी!!!
Comments (0)
Please login to share your comments.