मुझे प्यार हुआ था

मुझे प्यार हुआ था

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arati samant

17 Aug 20249 min read

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मुझे प्यार हुआ था

आज ऑफिस के किसी जरूरी क्लाइंट के साथ मीटिंग थी इसलिए रोहित सुबह ही उठ गया था। अपनी प्रेज़ेंटेशन को एक दफा फाइनल टच देने का सोच कॉफ़ी का मग हाथ में लिए लैपटॉप में डूबा हुआ था। इतने में उसकी माँ ने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, रोहित बेटा क्या बात है? कुछ ज्यादा काम है क्या? रात भर सोया कि नहीं?”रोहित ने अपनी मां की तरफ मुड़ कर कहा,” अरे नहीं माँ,  मैं सोया था पर जल्दी उठ गया। देखना था कुछ रह तो नहीं गया आज एक जरूरी प्रेजेंटेशन है।”

ऑफिस पहुंचकर जैसे ही रोहित ने कॉन्फ्रेंस रूम में रख कदम रखा उसकी नजर वहां पर बैठे एक लड़की की तरफ गयी। चेहरा जाना पहचाना हुआ था पर समझ में नहीं आ रहा था कि वो उसे जो सोच रहा है वह वही नहीं निकली तो लेने के देने ना पड़ जाए।ऊपर से प्रेजेंटेशन का टेंशन। ऐसे वक्त इन सब उलझनों में नहीं फँसना वह यह सोच ही रहा था कि उस  लड़की ने उसे देखा और कुछ इस तरह उसके चेहरे पर मुस्कान आयी जैसे उसने रोहित को पहचान लिया हो और आखिर उसने अपना हाथ उठाकर  उत्सुकतावश सबके सामने उसे आवाज दी, हाय  रोहित रोहित एक पल के लिए ठिठक सा गया आने वाले कुछ पलों में उसके दिमाग में पिछले 10 सालों का सफर तय कर लिया था।  कुछ सेकंड में उसे ऐसे लग रहा था जैसे कि वह कॉन्फ्रेंस रूम में नहीं पंजाब के अमृतसर के अपने मोहल्ले में पहुंच गया हो पर अचानक से जैसे उसे याद आया कि वह कहां है और उसे क्या करना है ?वहाँ उपस्थित सभी लोगों से औपचारिक रूप से मुलाकात करने के बाद रोहित ने अपना प्रेजेंटेशन दिया । प्रेजेंटेशन खत्म होने के बाद एक लंच ब्रेक था और उसके बाद वह सभी लोग आगे की पॉलिसी क्या होगी इसका निर्णय लेने वाले थे,निधि ने इशारा किया कि लंच ब्रेक में नीचे कैंटीन में मिलो।

रोहित अभी तक निधि को अपने सामने देखने के सदमे से बाहर नहीं आया था। जब आपके बचपन का पहला प्यार 10 साल बाद अचानक से सामने आ जाये तो ऐसा होना लाज़मी है। थोड़ी हिचकिचाहट, घबराहट, उत्सुकता और अजीब सी बैचेनी के साथ रोहित निधि को मिलने नीचे कैंटीन की तरफ बढ़ने लगा।

निधि मेहरा अमृतसर के हमारे वी पी सिंह हाईस्कूल की सबसे सुंदर लड़की जिससे हर लड़का दोस्ती करना चाहता था। रोहित के दोस्तों ने उससे पहले ही कह दिया था कि, “बेटा तेरे बस की बात नहीं है।अब तक हमारी तरफ देखा भी नहीं है और जिस तरह से तू शर्मीला और चोमू है तुमसे तो ना हो पायेगा।” 

अपने खयालों से निकलते ही रोहित कैंटीन मे पहुच गया और निधि को ढूंढने लगा। अचानक से किसी ने पीछे से रोहित के कंधे पर हाथ रखा तो देखा हाथ मे कॉफ़ी का मग लेकर पीछे निधि खड़ी थी होंठो पर वही पुरानी हंसी लेकर उसने रोहित से पूछा,” कैसे हो टॉपर?”

रोहित ने मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा तो तुम्हें मेरा यह वाला नाम भी याद है “।

इस पर निधि ने चुटकी लेते हुए कहा, “अरे भूल गए स्कूल में तो हैं लोग तुम्हारे असली नाम से कम और इस नाम से ज्यादा बुलाते थे। खैर छोड़ो आंटी अंकल कैसे हैं? और तुम यहां कैसे ?अमृतसर का टॉपर यहां मुंबई में क्या कर रहा है”

रोहित ने कहा,”जॉब के सिलसिले में यही शिफ्ट हो गया पापा को गुजरे 3 साल हो गए तबसे यही हूँ, अब यही हमारी कर्मभूमि है। तुम सुनाओ तुम जहां कैसे तुम तो इंदौर चली गई थी जब तुम्हारे पापा का ट्रांसफर हुआ था मैं तो सोचा ही नहीं था कि 10 साल बाद हम दोनों ऐसे मिलेंगे।”

निधि ने कहा, “मम्मी पापा तो अभी भी इंदौर में ही है मैं ही सिर्फ जॉब के सिलसिले में अकेले यहां शिफ्ट हो गई हूँ। तुमसे मिलकर सच में बहुत अच्छा लगा। मैं तो अमृतसर में हमारे बचपन को बहुत मिस करती हूं वह भी क्या बेफिक्री के दिन थे ना यार!  कहां हम ये नौकरी, परफॉर्मेंस, प्रमोशन, कंपटीशन टारगेट ये सब के चक्कर में पड़े हैं एक पल का सुकून नहीं छुट्टियां तो छोड़ो छुट्टी वाले दिन भी दिन भर फोन बजते ही रहता है ।

रोहित उसे बस एकटक देखे जा रहा था और फिर मुस्कुरा कर उसने कहा,” तुम बिल्कुल नहीं बदली ना निधि हम भी इतना ही बोलती हो जितना पहले बोलती थी ।

इस पर निधि ने जवाब दिया, “भई इसी के पैसे मिलते हैं हम सेल्स और मार्केटिंग वालों को ।” और दोनों खिलाकर हंस पड़े।

मीटिंग खत्म होने के बाद उन दोनों ने अपने नंबर एक्सचेंज किये और एक दूसरे के घर आने का निमंत्रण देकर चले गए। शाम को जब रोहित घर लौटा तो वह फिर से अतीत की यादों में खो गया। कहते हैं की चमत्कार होने में देर नहीं लगती जिस निधि मेहरा से दोस्ती करने के लिए सहारा स्कूल तड़प रहा था वह लड़की हमारे पड़ोस के मोहल्ले में ही अपने परिवार के साथ किराए के मकान में रहने के लिए आ गयी थी।

रोहित को अपनी किस्मत पर रश्क हो रहा था और बाकी लड़कों को जलन रोहित निधि और उसका छोटा भाई एक ही ऑटो में स्कूल से घर और घर से स्कूल जाते थे। निधि के पापा सब इंस्पेक्टर थे इसलिए किसी लड़की की हिम्मत नहीं होती कि मेरी के सामने जाकर बात करे। उस समय  टेलीफोन ही एक बात करने का सहारा था वरना आजकल के समय नहीं मोबाइल में वॉइस कॉल से लेकर वीडियो कॉल सब तरह की सुविधा है सब कुछ इतना तेज है शायद इसीलिए एक रिप्लाई ना आए ब्रेकअप होने में समय नहीं लगता।

एक ही मोहल्ले और साथ में आने जाने के कारण रोहित और निधि की अच्छी दोस्ती हो गई थी निधि स्वभाव से चंचल और हंसमुख थी और रोहित इसके बिल्कुल विपरीत । रोहित का निधि के प्रति आकर्षित होना स्वाभविक था। आते जाते उसे देखना, शाम को पार्क में बैठकर घंटों स्कूल और दोस्तों के बारे में बात करना, बात करते-करते उसका एक हल्का सा स्पर्श रोहित के पूरे बदन में रोमांच भर देता था ।यह प्यार था या नहीं पर रोहित को यकीन हो गया था जीवन निधि को पसंद करने लगा है और वह उसके लिए एक दोस्त से ज्यादा मायने रखती है। 

पर एक तरफा प्यार में रोहित की कभी हिम्मत ही नहीं हुई कि वह निधि से अपने प्यार का इजहार करे। 10वीं की बोर्ड की परीक्षाएं नजदीक आने वाली थी और उससे पहले स्कूल में फेयरवेल था। रोहित के दोस्तों ने उससे साफ कह दिया था कि अगर वह अपने दिल की बात उसे फेयरवेल वाले दिन नहीं कह पाया तो कभी नहीं कह पाएगा रोहित के लिए यह सब जितना मुशिकल था उससे ज्यादा नामुमकिन और खतरों से भरा । नामुमकिन इसलिए क्योंकि वह स्वभाव से शर्मिला था और खतरो से भरा इसलिए कि कहीं अपने प्यार का इजहार करने के चक्कर में 3 सालों की दोस्ती भी खराब ना हो जाए।

पर रोहित के दोस्त कहां मानने वाले थे उन्होंने रोहित को पूरी तरह से तैयार कर दिया था कि वह फेयरवेल वाले दिन निधि को अपने मन की बात बताएगा और तो और उसके दोस्तों ने फूलों के गुलदस्ते की भी तैयारी कर ली थी। रोहित मरता क्या न करता आखिर उसने अपने दोस्तों की मान ली और फेयरवेल वाले दिन निधि के घर के पास जाकर उसके बाहर आने का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर बाद निधि अपने घर से बाहर निकली ।लाल रंग की काली बॉर्डर वाली साड़ी उस पर बहुत जच रही थी रोहित बस उसे देखता ही रह गया और इतना खो गया कि पीछे हाथ में छुपाया हुआ गुलदस्ता नीचे गिर गया ।

निधि ने रोहित को इस हालत में देखकर पूछा, “क्या हुआ रोहित? ऑल ओके? सब ठीक है ?अरे यह क्या? थैंक गॉड तुम गुलदस्ता ले आए मैंने अपने भाई को भेजा था तुम्हें मैसेज देने के लिए मुझे गुलाब के फूल चाहिए मुझे लगा वो बेवकूफ तुम्हे मेसेज नहीं देगा चलो अच्छा हुआ।

निधि ने आगे  कहा, “तुम्हें तो पता ही होगा आज स्कूल में सबसे ज्यादा गुलाब का फूल पाने वाली लड़की को मिस मोस्ट वांटेड का खिताब मिलने वाला है और मैं चाहती थी कि सबसे ज्यादा गुलाब मेरे हाथ में हो। इस गुलदस्ते से काम चला लूंगी। गुलाब निकालकर अलग कर दूंगी,  अच्छा हुआ मेरा टाइम बच गया वरना मैं बाजार जाने वाली थी। थैंक्स”

रोहित कुछ न समझ पाया न कह पाया बस निधि के साथ चल दिया। परीक्षाएं खत्म होने के बाद भी निधि के पापा की इंदौर ट्रांसफर हो गई ।रिजल्ट वाले दिन भी रोहित की मुलाकात निधि से नहीं और प्यार दिल में दफन रह गया । कुछ सालों तक पहले फोन में बात होती रही फिर वो सिलसिला भी रुक गया ।

हालांकि इस बात को 10 साल की चुके थे पर रोहित अभी तक निधि को भुला नहीं पाया था और उसके बाद कई लोगों से मुलाकात होने के बाद भी इससे किसी और को अपने करीब आने नहीं दिया या महसूस ही नहीं किया। पहले प्यार का खुमार ही अलग होता है और जब वे एकतरफा हो तो भूले नही भूलता।

अचानक से रोहित के मोबाईल की लाइट जली और व्हाट्सएप में निधि का मेसेज आया। “क्या प्लान है वीकेंड का?”

रोहित ने मेसेज का जवाब दिया, “कुछ नहीं घर पर ही हूँ।”

निधि का वापस मेसेज आया, “कोई लड़की नही पटी अभी तक? और एक स्माईली इमोजी साथ में।”

रोहित अब टाइप करते करते रूक गया और सोचने लगा अब इसे कैसे जवाब दूँ कि “मुझे प्यार हुआ था और तुमसे ही हुआ था।”

 

आरती

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आज ऑफिस के किसी जरूरी क्लाइंट के साथ मीटिंग थी इसलिए रोहित सुबह ही उठ गया था। अपनी प्रेज़ेंटेशन को एक दफा फाइनल टच देने का सोच कॉफ़ी का मग हाथ में लिए लैपटॉप में डूबा हुआ था। इतने में उसकी माँ ने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, रोहित बेटा क्या बात है? कुछ ज्यादा काम है क्या? रात भर सोया कि नहीं?”रोहित ने अपनी मां की तरफ मुड़ कर कहा,” अरे नहीं माँ,  मैं सोया था पर जल्दी उठ गया। देखना था कुछ रह तो नहीं गया आज एक जरूरी प्रेजेंटेशन है।”

ऑफिस पहुंचकर जैसे ही रोहित ने कॉन्फ्रेंस रूम में रख कदम रखा उसकी नजर वहां पर बैठे एक लड़की की तरफ गयी। चेहरा जाना पहचाना हुआ था पर समझ में नहीं आ रहा था कि वो उसे जो सोच रहा है वह वही नहीं निकली तो लेने के देने ना पड़ जाए।ऊपर से प्रेजेंटेशन का टेंशन। ऐसे वक्त इन सब उलझनों में नहीं फँसना वह यह सोच ही रहा था कि उस  लड़की ने उसे देखा और कुछ इस तरह उसके चेहरे पर मुस्कान आयी जैसे उसने रोहित को पहचान लिया हो और आखिर उसने अपना हाथ उठाकर  उत्सुकतावश सबके सामने उसे आवाज दी, हाय  रोहित रोहित एक पल के लिए ठिठक सा गया आने वाले कुछ पलों में उसके दिमाग में पिछले 10 सालों का सफर तय कर लिया था।  कुछ सेकंड में उसे ऐसे लग रहा था जैसे कि वह कॉन्फ्रेंस रूम में नहीं पंजाब के अमृतसर के अपने मोहल्ले में पहुंच गया हो पर अचानक से जैसे उसे याद आया कि वह कहां है और उसे क्या करना है ?वहाँ उपस्थित सभी लोगों से औपचारिक रूप से मुलाकात करने के बाद रोहित ने अपना प्रेजेंटेशन दिया । प्रेजेंटेशन खत्म होने के बाद एक लंच ब्रेक था और उसके बाद वह सभी लोग आगे की पॉलिसी क्या होगी इसका निर्णय लेने वाले थे,निधि ने इशारा किया कि लंच ब्रेक में नीचे कैंटीन में मिलो।

रोहित अभी तक निधि को अपने सामने देखने के सदमे से बाहर नहीं आया था। जब आपके बचपन का पहला प्यार 10 साल बाद अचानक से सामने आ जाये तो ऐसा होना लाज़मी है। थोड़ी हिचकिचाहट, घबराहट, उत्सुकता और अजीब सी बैचेनी के साथ रोहित निधि को मिलने नीचे कैंटीन की तरफ बढ़ने लगा।

निधि मेहरा अमृतसर के हमारे वी पी सिंह हाईस्कूल की सबसे सुंदर लड़की जिससे हर लड़का दोस्ती करना चाहता था। रोहित के दोस्तों ने उससे पहले ही कह दिया था कि, “बेटा तेरे बस की बात नहीं है।अब तक हमारी तरफ देखा भी नहीं है और जिस तरह से तू शर्मीला और चोमू है तुमसे तो ना हो पायेगा।” 

अपने खयालों से निकलते ही रोहित कैंटीन मे पहुच गया और निधि को ढूंढने लगा। अचानक से किसी ने पीछे से रोहित के कंधे पर हाथ रखा तो देखा हाथ मे कॉफ़ी का मग लेकर पीछे निधि खड़ी थी होंठो पर वही पुरानी हंसी लेकर उसने रोहित से पूछा,” कैसे हो टॉपर?”

रोहित ने मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा तो तुम्हें मेरा यह वाला नाम भी याद है “।

इस पर निधि ने चुटकी लेते हुए कहा, “अरे भूल गए स्कूल में तो हैं लोग तुम्हारे असली नाम से कम और इस नाम से ज्यादा बुलाते थे। खैर छोड़ो आंटी अंकल कैसे हैं? और तुम यहां कैसे ?अमृतसर का टॉपर यहां मुंबई में क्या कर रहा है”

रोहित ने कहा,”जॉब के सिलसिले में यही शिफ्ट हो गया पापा को गुजरे 3 साल हो गए तबसे यही हूँ, अब यही हमारी कर्मभूमि है। तुम सुनाओ तुम जहां कैसे तुम तो इंदौर चली गई थी जब तुम्हारे पापा का ट्रांसफर हुआ था मैं तो सोचा ही नहीं था कि 10 साल बाद हम दोनों ऐसे मिलेंगे।”

निधि ने कहा, “मम्मी पापा तो अभी भी इंदौर में ही है मैं ही सिर्फ जॉब के सिलसिले में अकेले यहां शिफ्ट हो गई हूँ। तुमसे मिलकर सच में बहुत अच्छा लगा। मैं तो अमृतसर में हमारे बचपन को बहुत मिस करती हूं वह भी क्या बेफिक्री के दिन थे ना यार!  कहां हम ये नौकरी, परफॉर्मेंस, प्रमोशन, कंपटीशन टारगेट ये सब के चक्कर में पड़े हैं एक पल का सुकून नहीं छुट्टियां तो छोड़ो छुट्टी वाले दिन भी दिन भर फोन बजते ही रहता है ।

रोहित उसे बस एकटक देखे जा रहा था और फिर मुस्कुरा कर उसने कहा,” तुम बिल्कुल नहीं बदली ना निधि हम भी इतना ही बोलती हो जितना पहले बोलती थी ।

इस पर निधि ने जवाब दिया, “भई इसी के पैसे मिलते हैं हम सेल्स और मार्केटिंग वालों को ।” और दोनों खिलाकर हंस पड़े।

मीटिंग खत्म होने के बाद उन दोनों ने अपने नंबर एक्सचेंज किये और एक दूसरे के घर आने का निमंत्रण देकर चले गए। शाम को जब रोहित घर लौटा तो वह फिर से अतीत की यादों में खो गया। कहते हैं की चमत्कार होने में देर नहीं लगती जिस निधि मेहरा से दोस्ती करने के लिए सहारा स्कूल तड़प रहा था वह लड़की हमारे पड़ोस के मोहल्ले में ही अपने परिवार के साथ किराए के मकान में रहने के लिए आ गयी थी।

रोहित को अपनी किस्मत पर रश्क हो रहा था और बाकी लड़कों को जलन रोहित निधि और उसका छोटा भाई एक ही ऑटो में स्कूल से घर और घर से स्कूल जाते थे। निधि के पापा सब इंस्पेक्टर थे इसलिए किसी लड़की की हिम्मत नहीं होती कि मेरी के सामने जाकर बात करे। उस समय  टेलीफोन ही एक बात करने का सहारा था वरना आजकल के समय नहीं मोबाइल में वॉइस कॉल से लेकर वीडियो कॉल सब तरह की सुविधा है सब कुछ इतना तेज है शायद इसीलिए एक रिप्लाई ना आए ब्रेकअप होने में समय नहीं लगता।

एक ही मोहल्ले और साथ में आने जाने के कारण रोहित और निधि की अच्छी दोस्ती हो गई थी निधि स्वभाव से चंचल और हंसमुख थी और रोहित इसके बिल्कुल विपरीत । रोहित का निधि के प्रति आकर्षित होना स्वाभविक था। आते जाते उसे देखना, शाम को पार्क में बैठकर घंटों स्कूल और दोस्तों के बारे में बात करना, बात करते-करते उसका एक हल्का सा स्पर्श रोहित के पूरे बदन में रोमांच भर देता था ।यह प्यार था या नहीं पर रोहित को यकीन हो गया था जीवन निधि को पसंद करने लगा है और वह उसके लिए एक दोस्त से ज्यादा मायने रखती है। 

पर एक तरफा प्यार में रोहित की कभी हिम्मत ही नहीं हुई कि वह निधि से अपने प्यार का इजहार करे। 10वीं की बोर्ड की परीक्षाएं नजदीक आने वाली थी और उससे पहले स्कूल में फेयरवेल था। रोहित के दोस्तों ने उससे साफ कह दिया था कि अगर वह अपने दिल की बात उसे फेयरवेल वाले दिन नहीं कह पाया तो कभी नहीं कह पाएगा रोहित के लिए यह सब जितना मुशिकल था उससे ज्यादा नामुमकिन और खतरों से भरा । नामुमकिन इसलिए क्योंकि वह स्वभाव से शर्मिला था और खतरो से भरा इसलिए कि कहीं अपने प्यार का इजहार करने के चक्कर में 3 सालों की दोस्ती भी खराब ना हो जाए।

पर रोहित के दोस्त कहां मानने वाले थे उन्होंने रोहित को पूरी तरह से तैयार कर दिया था कि वह फेयरवेल वाले दिन निधि को अपने मन की बात बताएगा और तो और उसके दोस्तों ने फूलों के गुलदस्ते की भी तैयारी कर ली थी। रोहित मरता क्या न करता आखिर उसने अपने दोस्तों की मान ली और फेयरवेल वाले दिन निधि के घर के पास जाकर उसके बाहर आने का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर बाद निधि अपने घर से बाहर निकली ।लाल रंग की काली बॉर्डर वाली साड़ी उस पर बहुत जच रही थी रोहित बस उसे देखता ही रह गया और इतना खो गया कि पीछे हाथ में छुपाया हुआ गुलदस्ता नीचे गिर गया ।

निधि ने रोहित को इस हालत में देखकर पूछा, “क्या हुआ रोहित? ऑल ओके? सब ठीक है ?अरे यह क्या? थैंक गॉड तुम गुलदस्ता ले आए मैंने अपने भाई को भेजा था तुम्हें मैसेज देने के लिए मुझे गुलाब के फूल चाहिए मुझे लगा वो बेवकूफ तुम्हे मेसेज नहीं देगा चलो अच्छा हुआ।

निधि ने आगे  कहा, “तुम्हें तो पता ही होगा आज स्कूल में सबसे ज्यादा गुलाब का फूल पाने वाली लड़की को मिस मोस्ट वांटेड का खिताब मिलने वाला है और मैं चाहती थी कि सबसे ज्यादा गुलाब मेरे हाथ में हो। इस गुलदस्ते से काम चला लूंगी। गुलाब निकालकर अलग कर दूंगी,  अच्छा हुआ मेरा टाइम बच गया वरना मैं बाजार जाने वाली थी। थैंक्स”

रोहित कुछ न समझ पाया न कह पाया बस निधि के साथ चल दिया। परीक्षाएं खत्म होने के बाद भी निधि के पापा की इंदौर ट्रांसफर हो गई ।रिजल्ट वाले दिन भी रोहित की मुलाकात निधि से नहीं और प्यार दिल में दफन रह गया । कुछ सालों तक पहले फोन में बात होती रही फिर वो सिलसिला भी रुक गया ।

हालांकि इस बात को 10 साल की चुके थे पर रोहित अभी तक निधि को भुला नहीं पाया था और उसके बाद कई लोगों से मुलाकात होने के बाद भी इससे किसी और को अपने करीब आने नहीं दिया या महसूस ही नहीं किया। पहले प्यार का खुमार ही अलग होता है और जब वे एकतरफा हो तो भूले नही भूलता।

अचानक से रोहित के मोबाईल की लाइट जली और व्हाट्सएप में निधि का मेसेज आया। “क्या प्लान है वीकेंड का?”

रोहित ने मेसेज का जवाब दिया, “कुछ नहीं घर पर ही हूँ।”

निधि का वापस मेसेज आया, “कोई लड़की नही पटी अभी तक? और एक स्माईली इमोजी साथ में।”

रोहित अब टाइप करते करते रूक गया और सोचने लगा अब इसे कैसे जवाब दूँ कि “मुझे प्यार हुआ था और तुमसे ही हुआ था।”

 

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