आधी रात का वो मैसेज

आधी रात का वो मैसेज

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Bittu Jain

1 Sept 20265 min read

Published in storieslatest

रात के ठीक 12:17 बजे अनाया के फोन पर एक मैसेज आया।

“खिड़की मत खोलना… मैं तुम्हें देख रहा हूँ।”

अनाया के हाथ से फोन लगभग गिर ही गया। वह अपने कमरे में अकेली थी। उसने तुरंत खिड़की की तरफ देखा।

परदे बंद थे। कमरे में सिर्फ़ घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी। उसने काँपते हाथों से नंबर देखा।

Unknown Number.

अनाया ने तुरंत फोन बंद कर दिया। लेकिन कुछ ही सेकंड बाद फिर notification आया।

“डर गई?”

इस बार उसके दिल की धड़कन तेज़ हो गई। उसने नंबर block कर दिया।

उसे लगा शायद कोई दोस्त मज़ाक कर रहा होगा। लेकिन तभी...

खिड़की के बाहर हल्की-सी आहट हुई। अनाया कुछ पल तक बिल्कुल शांत खड़ी रही। फिर धीरे-धीरे उसने परदे के पास जाकर देखा।

बाहर अंधेरा था। कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

वह वापस पलटने ही वाली थी कि फोन फिर बजा।

“मैंने कहा था ना… खिड़की मत खोलना।”

अनाया की आँखें फैल गईं। उसने तुरंत अपनी बड़ी बहन को फोन किया, लेकिन फोन बंद था। तभी उसे याद आया कि सामने वाले apartment में आरव रहता था।

आरव...

वही लड़का जिससे उसकी कुछ महीनों पहले दोस्ती हुई थी। शांत, कम बोलने वाला और हमेशा उसकी मदद करने वाला। अनाया ने उसे call किया।

एक बार...

दो बार...

तीसरी बार फोन उठा।

“हैलो?”

अनाया की आवाज़ काँप रही थी।

“आरव... क्या तुम जाग रहे हो?”

“हाँ। क्यों?”

“मेरे फोन पर कोई अजीब messages भेज रहा है।”

कुछ सेकंड खामोशी रही।

फिर आरव ने पूछा...

“क्या लिखा है?”

अनाया ने उसे पूरा message बताया।

आरव की आवाज़ अचानक गंभीर हो गई,“अनाया, कमरे से बाहर मत निकलना।”

“लेकिन क्यों?”

“बस मेरी बात मानो।”

“आरव, तुम मुझे डरा रहे हो।”

“मैं पाँच मिनट में तुम्हारे पास पहुँचता हूँ।”

फोन कट गया।

अनाया कमरे के बीचों-बीच खड़ी रही।

पाँच मिनट उसे पाँच घंटे जैसे लगे।

फिर doorbell बजी।

अनाया ने peephole से देखा। आरव खड़ा था। उसने दरवाज़ा खोला।

आरव अंदर आते ही बोला...“तुम ठीक हो?”

अनाया ने सिर हिलाया।

“हाँ... लेकिन ये सब कौन कर रहा है?”

आरव ने उसका फोन लिया। उसने messages देखे।

फिर अचानक उसकी नजर एक चीज़ पर रुक गई।

“तुमने ये नंबर पहले कहीं देखा है?”

“नहीं।”

आरव ने कुछ नहीं कहा। उसने फोन वापस कर दिया।

“आज रात अकेली मत रहना।”

अनाया ने उसकी तरफ देखा,“तुम मेरे लिए इतना परेशान क्यों हो?”

आरव चुप रहा। फिर धीरे से बोला...“क्योंकि तुम मेरे लिए सिर्फ़ एक दोस्त नहीं हो।”

अनाया कुछ कह पाती, उससे पहले फोन फिर बजा।

इस बार message छोटा था,“उसे अपने कमरे से बाहर भेज दो।”

दोनों एक-दूसरे को देखने लगे।

आरव का चेहरा अचानक बदल गया,“अनाया...”

“क्या हुआ?”

“ये व्यक्ति सिर्फ़ तुम्हें नहीं देख रहा।”

“तो?”

आरव ने खिड़की की तरफ देखा।

“ये मुझे भी जानता है।”

अगले दिन अनाया ने पुलिस में शिकायत करने का फैसला किया।

लेकिन उससे पहले आरव ने उसे एक बात बताई। करीब एक साल पहले वह इसी शहर में नहीं रहता था। उसकी एक पुरानी दोस्त थी, जिसने अचानक उससे सारे रिश्ते खत्म कर लिए थे।

कुछ महीनों बाद उसकी मौत की खबर आई थी।

आरव को हमेशा शक था कि उसकी मौत हादसा नहीं थी। और कुछ दिनों पहले उसे भी unknown messages आने शुरू हुए थे।

अनाया ने हैरानी से पूछा... “तो तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?”

आरव ने उसकी तरफ देखा, “क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि तुम इस सब में फँसो।”

“लेकिन अब तो मैं फँस चुकी हूँ।”

आरव कुछ नहीं बोला। उसी समय आरव के फोन पर एक message आया।

“अगर सच जानना है तो आज रात 12:17 बजे पुराने पुल पर आना।”

अनाया ने भी वह message पढ़ा, “तुम वहाँ नहीं जाओगे।”

आरव ने कहा...“मुझे जाना पड़ेगा।”

“मैं भी चलूँगी।”

“नहीं।”

“तो फिर तुम भी नहीं जाओगे।”

आरव ने पहली बार उसे ध्यान से देखा।

फिर हल्की मुस्कान आई, “तुम हमेशा से ही इतनी जिद्दी थीं?”

अनाया ने कहा... “तुम्हारे सामने ही बनी हूँ।”

रात 12:17 बजे दोनों पुराने पुल पर पहुँचे।

वहाँ कोई नहीं था। सिर्फ़ नदी की आवाज़ और तेज़ हवा। कुछ मिनट बाद एक आदमी अंधेरे से बाहर आया। उसने चेहरा ढका हुआ था।

आरव उसके सामने खड़ा हो गया।

“कौन हो तुम?”

वह आदमी हँसा।

“तुम्हें सच में नहीं पता?”

उसने जेब से एक पुरानी तस्वीर निकाली और आरव की तरफ फेंक दी।

तस्वीर में आरव की वही पुरानी दोस्त थी। लेकिन तस्वीर के पीछे एक तारीख़ लिखी थी। उसकी मौत के एक दिन बाद की।

आरव के चेहरे का रंग उड़ गया।

“ये तुम्हारे पास कैसे आई?”

वह आदमी कुछ बोलता, उससे पहले पुलिस की गाड़ियाँ वहाँ पहुँच गईं असल में आरव ने पुलिस को पहले ही location भेज दी थी। उस आदमी को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में पता चला कि वह उस लड़की की मौत का जिम्मेदार था और आरव को चुप कराने के लिए उसे डराता रहा था। लेकिन वह अनाया तक इसलिए पहुँचा क्योंकि उसे पता था कि आरव उससे प्यार करने लगा है।

कुछ दिनों बाद सब कुछ शांत हो गया।

एक शाम अनाया और आरव उसी पुल के पास बैठे थे। अनाया ने धीरे से पूछा...“उस रात तुमने कहा था कि मैं तुम्हारे लिए सिर्फ़ दोस्त नहीं हूँ।”

आरव मुस्कुराया, “हाँ।”

“तो फिर अब क्या हूँ?”

आरव ने उसकी तरफ देखा, “जिसके लिए मैं डरता भी हूँ... और जिसके बिना रहने से भी डरता हूँ।”

अनाया मुस्कुरा दी, “तो डरना बंद करो।”

“कैसे?”

“क्योंकि अब मैं तुम्हारे साथ हूँ।” आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।

इस बार किसी unknown number का message नहीं आया।

फोन बिल्कुल शांत था।

लेकिन दोनों के दिलों में एक नई कहानी शुरू हो चुकी थी। ❤️

कभी-कभी जिंदगी हमें डराकर उन लोगों के करीब ले आती है, जिन्हें हम खोना नहीं चाहते।

❤️ लेखक की ओर से

अगर आपको ऐसी Romantic, Emotional और Suspense Stories पसंद हैं, तो मुझे Follow जरूर करें।

और Comment करके बताइए—क्या आप ऐसी कहानियाँ Parts में पढ़ना चाहेंगे? ❤️

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रात के ठीक 12:17 बजे अनाया के फोन पर एक मैसेज आया।

“खिड़की मत खोलना… मैं तुम्हें देख रहा हूँ।”

अनाया के हाथ से फोन लगभग गिर ही गया। वह अपने कमरे में अकेली थी। उसने तुरंत खिड़की की तरफ देखा।

परदे बंद थे। कमरे में सिर्फ़ घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी। उसने काँपते हाथों से नंबर देखा।

Unknown Number.

अनाया ने तुरंत फोन बंद कर दिया। लेकिन कुछ ही सेकंड बाद फिर notification आया।

“डर गई?”

इस बार उसके दिल की धड़कन तेज़ हो गई। उसने नंबर block कर दिया।

उसे लगा शायद कोई दोस्त मज़ाक कर रहा होगा। लेकिन तभी...

खिड़की के बाहर हल्की-सी आहट हुई। अनाया कुछ पल तक बिल्कुल शांत खड़ी रही। फिर धीरे-धीरे उसने परदे के पास जाकर देखा।

बाहर अंधेरा था। कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

वह वापस पलटने ही वाली थी कि फोन फिर बजा।

“मैंने कहा था ना… खिड़की मत खोलना।”

अनाया की आँखें फैल गईं। उसने तुरंत अपनी बड़ी बहन को फोन किया, लेकिन फोन बंद था। तभी उसे याद आया कि सामने वाले apartment में आरव रहता था।

आरव...

वही लड़का जिससे उसकी कुछ महीनों पहले दोस्ती हुई थी। शांत, कम बोलने वाला और हमेशा उसकी मदद करने वाला। अनाया ने उसे call किया।

एक बार...

दो बार...

तीसरी बार फोन उठा।

“हैलो?”

अनाया की आवाज़ काँप रही थी।

“आरव... क्या तुम जाग रहे हो?”

“हाँ। क्यों?”

“मेरे फोन पर कोई अजीब messages भेज रहा है।”

कुछ सेकंड खामोशी रही।

फिर आरव ने पूछा...

“क्या लिखा है?”

अनाया ने उसे पूरा message बताया।

आरव की आवाज़ अचानक गंभीर हो गई,“अनाया, कमरे से बाहर मत निकलना।”

“लेकिन क्यों?”

“बस मेरी बात मानो।”

“आरव, तुम मुझे डरा रहे हो।”

“मैं पाँच मिनट में तुम्हारे पास पहुँचता हूँ।”

फोन कट गया।

अनाया कमरे के बीचों-बीच खड़ी रही।

पाँच मिनट उसे पाँच घंटे जैसे लगे।

फिर doorbell बजी।

अनाया ने peephole से देखा। आरव खड़ा था। उसने दरवाज़ा खोला।

आरव अंदर आते ही बोला...“तुम ठीक हो?”

अनाया ने सिर हिलाया।

“हाँ... लेकिन ये सब कौन कर रहा है?”

आरव ने उसका फोन लिया। उसने messages देखे।

फिर अचानक उसकी नजर एक चीज़ पर रुक गई।

“तुमने ये नंबर पहले कहीं देखा है?”

“नहीं।”

आरव ने कुछ नहीं कहा। उसने फोन वापस कर दिया।

“आज रात अकेली मत रहना।”

अनाया ने उसकी तरफ देखा,“तुम मेरे लिए इतना परेशान क्यों हो?”

आरव चुप रहा। फिर धीरे से बोला...“क्योंकि तुम मेरे लिए सिर्फ़ एक दोस्त नहीं हो।”

अनाया कुछ कह पाती, उससे पहले फोन फिर बजा।

इस बार message छोटा था,“उसे अपने कमरे से बाहर भेज दो।”

दोनों एक-दूसरे को देखने लगे।

आरव का चेहरा अचानक बदल गया,“अनाया...”

“क्या हुआ?”

“ये व्यक्ति सिर्फ़ तुम्हें नहीं देख रहा।”

“तो?”

आरव ने खिड़की की तरफ देखा।

“ये मुझे भी जानता है।”

अगले दिन अनाया ने पुलिस में शिकायत करने का फैसला किया।

लेकिन उससे पहले आरव ने उसे एक बात बताई। करीब एक साल पहले वह इसी शहर में नहीं रहता था। उसकी एक पुरानी दोस्त थी, जिसने अचानक उससे सारे रिश्ते खत्म कर लिए थे।

कुछ महीनों बाद उसकी मौत की खबर आई थी।

आरव को हमेशा शक था कि उसकी मौत हादसा नहीं थी। और कुछ दिनों पहले उसे भी unknown messages आने शुरू हुए थे।

अनाया ने हैरानी से पूछा... “तो तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?”

आरव ने उसकी तरफ देखा, “क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि तुम इस सब में फँसो।”

“लेकिन अब तो मैं फँस चुकी हूँ।”

आरव कुछ नहीं बोला। उसी समय आरव के फोन पर एक message आया।

“अगर सच जानना है तो आज रात 12:17 बजे पुराने पुल पर आना।”

अनाया ने भी वह message पढ़ा, “तुम वहाँ नहीं जाओगे।”

आरव ने कहा...“मुझे जाना पड़ेगा।”

“मैं भी चलूँगी।”

“नहीं।”

“तो फिर तुम भी नहीं जाओगे।”

आरव ने पहली बार उसे ध्यान से देखा।

फिर हल्की मुस्कान आई, “तुम हमेशा से ही इतनी जिद्दी थीं?”

अनाया ने कहा... “तुम्हारे सामने ही बनी हूँ।”

रात 12:17 बजे दोनों पुराने पुल पर पहुँचे।

वहाँ कोई नहीं था। सिर्फ़ नदी की आवाज़ और तेज़ हवा। कुछ मिनट बाद एक आदमी अंधेरे से बाहर आया। उसने चेहरा ढका हुआ था।

आरव उसके सामने खड़ा हो गया।

“कौन हो तुम?”

वह आदमी हँसा।

“तुम्हें सच में नहीं पता?”

उसने जेब से एक पुरानी तस्वीर निकाली और आरव की तरफ फेंक दी।

तस्वीर में आरव की वही पुरानी दोस्त थी। लेकिन तस्वीर के पीछे एक तारीख़ लिखी थी। उसकी मौत के एक दिन बाद की।

आरव के चेहरे का रंग उड़ गया।

“ये तुम्हारे पास कैसे आई?”

वह आदमी कुछ बोलता, उससे पहले पुलिस की गाड़ियाँ वहाँ पहुँच गईं असल में आरव ने पुलिस को पहले ही location भेज दी थी। उस आदमी को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में पता चला कि वह उस लड़की की मौत का जिम्मेदार था और आरव को चुप कराने के लिए उसे डराता रहा था। लेकिन वह अनाया तक इसलिए पहुँचा क्योंकि उसे पता था कि आरव उससे प्यार करने लगा है।

कुछ दिनों बाद सब कुछ शांत हो गया।

एक शाम अनाया और आरव उसी पुल के पास बैठे थे। अनाया ने धीरे से पूछा...“उस रात तुमने कहा था कि मैं तुम्हारे लिए सिर्फ़ दोस्त नहीं हूँ।”

आरव मुस्कुराया, “हाँ।”

“तो फिर अब क्या हूँ?”

आरव ने उसकी तरफ देखा, “जिसके लिए मैं डरता भी हूँ... और जिसके बिना रहने से भी डरता हूँ।”

अनाया मुस्कुरा दी, “तो डरना बंद करो।”

“कैसे?”

“क्योंकि अब मैं तुम्हारे साथ हूँ।” आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।

इस बार किसी unknown number का message नहीं आया।

फोन बिल्कुल शांत था।

लेकिन दोनों के दिलों में एक नई कहानी शुरू हो चुकी थी। ❤️

कभी-कभी जिंदगी हमें डराकर उन लोगों के करीब ले आती है, जिन्हें हम खोना नहीं चाहते।

❤️ लेखक की ओर से

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