हमारा वहम

हमारा वहम

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dineshkumar singh

28 Jul 20241 min read

Published in poetry

हमारा वहम

यह हमारा वहम है

कि हम, अहम है।

 

एक दिन में हम

जितनी साँस लेते हैं,

हमारी पुरी जिंदगी में

दिन, उससे भी कम है।

फिर भी हमें वहम है

कि हम, अहम है।

 

जीवन की अहमियत को

अगर समझना हो तो,

दिन गिनना शुरू कर दो।

आज को आखिरी दिन

समझकर, उसमें खुशियाँ

भरना शुरू कर दो।

 

सब छोड़ कर यहाँ

खाली हाथ जाना है,

फिर काहे का ग़म है।

 

जब तक सांस चले,

तब तक तुम हो, 

तब तक हम है।

फिर काहे का कौन,

किसका, क्या है, कब है।?

सारे रिश्ते नाते भी ख़तम है।

 

हम अहम है।

यह एक वहम है।

 

 

रचयिता- दिनेश कुमार सिंह

 

 

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यह हमारा वहम है

कि हम, अहम है।

 

एक दिन में हम

जितनी साँस लेते हैं,

हमारी पुरी जिंदगी में

दिन, उससे भी कम है।

फिर भी हमें वहम है

कि हम, अहम है।

 

जीवन की अहमियत को

अगर समझना हो तो,

दिन गिनना शुरू कर दो।

आज को आखिरी दिन

समझकर, उसमें खुशियाँ

भरना शुरू कर दो।

 

सब छोड़ कर यहाँ

खाली हाथ जाना है,

फिर काहे का ग़म है।

 

जब तक सांस चले,

तब तक तुम हो, 

तब तक हम है।

फिर काहे का कौन,

किसका, क्या है, कब है।?

सारे रिश्ते नाते भी ख़तम है।

 

हम अहम है।

यह एक वहम है।

 

 

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