
फासला

दिसम्बर और जनवरी सा
रिश्ता रहा है हम में
करीब लगता है बहुत मगर
बरस भर का फासला है।
कितनी भी मुहब्बत से भरा हो दिल
जुबान तक न आएगा
गहराइयों में दबा रहा बरसों, और
दिल से जुबान तक बड़ा फासला है।
न उम्मीद किसी से
न नाराज़गी ही किसी से
फर्क है ये समझ का बस
हमारी सोच में ही बड़ा फासला है ।
~मीनू यातिन
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